29/09/2023
हमारी अंधी भोग की कामना करोड़ों मवेशियों के शोषण और हत्या का कारण है, हम चंद पैसे देकर दुग्ध उत्पाद का भोग बड़े आराम से करते हैं लेकिन उनका क्या जिन्होंने आपके स्वाद लेने के चक्कर में शोषण का शिकार हो गए हैं। हम दूध (और दूध उत्पाद) का स्वाद ले सकें इसलिए डेयरी उद्योग मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान करता है, नर बछड़ों को पैदा होते ही मार दिया जाता है, अधिक दूध के लिए मवेशियों को तरह तरह के इंजेक्शन चुभाए जाते हैं, गन्दी जगह में उन्हें कैद करके रखा जाता है और अंत में जब मवेशी दूध देने लायक नहीं रहती है तो उन्हें कत्लखाने भेज दिया जाता है और वहां भी उन्हें मारने के बाद उनके शरीर के कई हिस्सों को पैसे के लिए बेच दिया जाता है जैसे - माँस, चमड़ा, हड्डी, सींघ इत्यादि । क्या हमारी अंधी कामना के लिए मवेशियों का तड़प-तड़प कर मरना सही है? बिलकुल नहीं, हमारी जिम्मेदारी है की हम जानवरों का ख्याल रखें... भोग के लिए नहीं, करुणा के नाते । वनस्पति आधारित दूध, , डेयरी दूध के सबसे अच्छे विकल्प हैं। मवेशियों के साथ हो रहे इस क्रूरता को समाप्त करने के लिए बोध और करुणा को अपने जीवन का आधार बनाएं, वीगन बनें।
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