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सावण बीकानेर
21/07/2023

सावण बीकानेर

गाय पालन के लिए गोचर की जमीन और ओरण चाहिए- जलपुरुष राजेन्द्र सिंह---गाय के संवर्द्धन के लिए खुली गौ चराई अत्यंत आवश्यक ह...
07/07/2023

गाय पालन के लिए गोचर की जमीन और ओरण चाहिए- जलपुरुष राजेन्द्र सिंह
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गाय के संवर्द्धन के लिए खुली गौ चराई अत्यंत आवश्यक है। मैं पिछले दो दिनों से गायों को चरा रहा हूं। इस दौरान देखा कि, गाय चराई से बहुत आनंदित होती है और दूध भी अधिक देती है। गाय खुली चराई से ही सबसे अधिक आनंदित लगती है। आज कल लोग मशीन से बनी हुई बहुत सारी चीजें गाय को खिलाते हैं। जिससे थोड़ा दूध जरूर बढ़ जाता है, लेकिन गाय का स्वास्थ्य अच्छा नही रहता। खुली चराई वाली गाय का दूध बहुत विशिष्ट गुण वाला पोषक होता है।
मुझे बचपन से ही खेती और गौ-पालन में रुचि रही है, इसलिए अब भी जब कभी अवसर मिलता है,तो गौ पालन, खेती का काम, तुलसी रोपण, जल, जंगल, जमीन, जंगल वासियों और जानवरों का संरक्षण करता हूँ। इससे मुझे तो बहुत आनंद आता ही है, पर उससे भी ज्यादा आनंद गाय को खुली चराई में आता है।
गाय के खुले चरने से उसके शरीर पर रहने वाले पराजीवियों को पक्षी उनके ऊपर बैठकर, चुन चुन कर खाते रहते है। प्राकृतिक जीवन के क्रम में गाय के साथ हमारा बहुत गहरा रिश्ता था,लेकिन गाय के लिए बने कानूनों ने गाय के जीवन को अधिक जटिल बना दिया है। कानूनों की आवश्यकता वहाँ होती है, जहाँ मनुष्य लालची - लुटेरा होकर बहुत जटिलता से जीवन जीता है। कई बार जिसके संरक्षण के लिए कानून बनता है,उसी के लिए घातक हो जाता है, इसलिए गाय पालन के लिए गोचर की जमीन और ओरण चाहिए। जिससे गाय अपनी आजादी से चर सके।
तरुण आश्रम में पहले खेती की जमीन नहीं थी, लेकिन 40 साल के बाद अब थोड़ी खेती की जमीन बन गई है, क्योंकि पहले दिन से ही गाय हमारे आश्रम में रहती थी। गाय के गोबर से भी मिट्टी बनी हैं। तरुण आश्रम के कार्यकर्ताओं ने जहां मिट्टी नहीं थी, केवल पत्थर थे, वहाँ के पत्थरों को निकालकर, मिट्टी बनाने में ढेंचा, अरहर, सरसों, तरा ,तिल, मूंग , उड़द आदि की फसल की है,इनकी जड़ों और पत्तों ने मिट्टी बनाने में मदद की है। इस मिट्टी को बनाने में आश्रम की ऋषि खेती और वृक्ष खेती की भी अहम भूमिका रही है। यह मिट्टी दूसरों के खेतो जैसी तो नहीं हैं लेकिन फिर भी अब छोटे छोटे पत्थरों के साथ मिट्टी जैसी दिखती है। यह अत्यंत कम पानी का क्षेत्र है। पहले जब यहां मैंने काम शुरू किया था तो भैसें नहीं थीं और गाय भी बहुत कम थी , बकरी और कुछ ऊंट ही दिखते थे। आज कल तो गाय की जगह भैंस ने ले ली है। भैंस भी ठीक है, लेकिन गाय कठिन परिस्थिति में भी हमारे पोषण के लिए अतिगुणकारी बनी रहतीबहै, इसलिए गाय का पालन आजादी से उसकी चराई के साथ जुड़ा है। यह जलवायु परिवर्तन के संकट में भी अपने आपको टिकाए रखने वाली , करुणामय प्राणी है। इसका पालन अहिंसामय है। इसलिए इसे अभी भी पालने और पोषण करने की अत्यंत आवश्यकता है।
मैं गाय चराते हुए बहुत आनंदित होता हूं, क्योंकि गाय खुले में चर कर बहुत आनंदित होती है। अतः खुली चराई गाय के आनंद और संवर्द्धन के लिए जरूरी है। जब तक गायों को खुली चराई थी,तब तक गाय हमारी माता के समान, हम से कुछ भी लिए बिना अपना सब कुछ देती रहती थी। क्योंकि उसे चरने की जगह तथा पेड़ों के पत्ते खाने के पर्याप्त अवसर मिलते थे। विविध प्रकार की वनस्पतियां खाकर , हमारे लिए औषधिमय दूध देती थी। अब हमें उसके पोषण के लिए बाजार चाहिए और हमारे पोषण के लिए भी बाजार जरूरी हो गया है। बाजार तो सदेव ही हिंसक और लुटेरा होता है। भारत में गौ बध रोकने के लिए बड़ा कानून है, लेकिन गो-मांस का बड़ा व्यापारी भारत देश ही है। कानून से तो हमारी गाय बाजार मुक्त है लेकिन व्यवहार में गाय के सभी अंगों - प्रत्यंगो का व्यापार बढ़ता ही जा रहा है। दिल्ली के चारों तरफ नई तकनीक के बूचर खाने दिन - प्रतिदान बढ़ते जा रहे है। गाय के गोचर और ओरण सुकुड़ते जा रहे हैं। यह कुछ गांवों में तो बिलकुल खत्म हो गए हैं। अब गाय के लिए आनंद और चराई दूर - दूर तक नजर नही आती।

राजेन्द्र सिंह

07/07/2023

फ़र्मेंटेड फ़ूड

जैसे बड़े खीरे का २-३ दिन पुराना रायता.

घर पर ख़मीर यानी यीस्ट से तैयार की गई ब्रेड.

बिना बाज़ारी मसाले के तैयार किया गया अचार. जिसमें कभी थोड़ा बहुत फ़ंगस भी लग जाती है. सामान्यतः एस्पर्जिलस और पेनिसिलियम

आम, खीरे और अन्य सब्ज़ियों के पानी वाले अचार.

इडली-डोसा.

पानी में रात भर भिगोए चावल

फ़र्मेंटेड घोल से बने पापड़.

ये सब भारत में प्रचलित खाद्य हैं जो समय के साथ ग़ायब होते जा रहे हैं और इनके साथ जुड़े स्वास्थ्य लाभ भी.

आपने इनमें से क्या क्या खाया है? क्या आपको और भी डिशेज़ याद हैं? पूर्वीभारत में तो और भी कई प्रकार के फ़र्मेंटेड फ़ूड चलन में हैं. पूर्वी एशिया में ऐसी ढेरों डिशेज़ प्रचलित हैं. यूपियंस पनीर और मांस को भी फ़रमेंट करके खाते हैं. फ़र्मेंटेड मिर्ची यानी टोबास्को अपने यहाँ भी सुपर मार्केट में मिलने लगा है.

भाग दौड़ वाली ज़िंदगी में हमारा भोजन भी रेडीमेड होता जा रहा है जिसमें सिंथेटिक केमिकल्स का हिस्सा और विविधता बढ़ती जा रही है.

प्रिज़र्वेटिव, फ्लेवर, फ्रेग्रेन्स और टेक्सचर एन्हांसर. अरबों रुपयों का बाज़ार है.

क्विक मील के चक्कर में शरीर का नुक़सान होना है, ड्यूरेबिलिटी कम होगी ही और तरह तरह दिक़्क़तें बढ़ती जायेंगी जिनका कारण ढूँढना सामान्य प्रचलित तरीक़ों से संभव नहीं होता.

Dr Pushpendra Awadhiya

विश्व दुग्ध दिवस ।राजस्थान सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला राज्य बना हुआ है।और इसमें सर्वाधिक योगदान महिलाओं और गाय का है
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02/12/2022

Sahiwal pregnant heifer

My lecture on indigenous breeds cows at agriculture collage Pune 28 May
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Please read the story of a farmer name Jagdeesh reddy .
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