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26/10/2024

Content filed under the Intro to Macroeconomics taxonomy.

25/12/2023
26/11/2023

ਕਦੇ ਗੋਰੇ ਪੰਜਾਬੀ ਦੀ ਆਈਲਟ ਕਰਦੇ ਸੀ:
ਕਦੇ ਗੋਰੇ ਪੰਜਾਬੀ ਦੀ ਆਈਲਟ ਕਰਦੇ ਸੀ:

ਇਹ ਪੰਜਾਬੀ ਦੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਨੂੰ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਵਿੱਚ ਉਲੱਥਾ ਕਰਕੇ 1838 ਈਸਵੀ ਵਿੱਚ ਰੌਬਰਟ ਲੀਚ (Robert Leech) ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਦੱਸਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸ਼ੇਰ-ਏ-ਪੰਜਾਬ ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੇ ਚੜ੍ਹਾਈ ਕਰ ਜਾਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਵੇਲੇ ਦਾ ਵਾਕਿਆ ਹੈ ਜੀ।
ਇਹ ਪੰਜਾਬੀ ਦੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਨੂੰ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਵਿੱਚ ਉਲੱਥਾ ਕਰਕੇ 1838 ਈਸਵੀ ਵਿੱਚ ਰੌਬਰਟ ਲੀਚ (Robert Leech) ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਦੱਸਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸ਼ੇਰ-ਏ-ਪੰਜਾਬ ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੇ ਚੜ੍ਹਾਈ ਕਰ ਜਾਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਵੇਲੇ ਦਾ ਵਾਕਿਆ ਹੈ ਜੀ।

08/04/2023

Money and Its Functions

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Write a blog on money

Money is a ubiquitous and essential aspect of modern society. It is a medium of exchange that allows individuals to purchase goods and services, pay for debts, and accumulate wealth. Despite its importance, money can be a source of confusion, anxiety, and even conflict for many people. In this blog, we will explore some fundamental aspects of money, including its history, functions, and role in society.

A Brief History of Money

Money has been used as a medium of exchange for thousands of years. In ancient times, people used barter, exchanging goods and services directly without the use of money. Over time, societies developed various forms of currency, such as precious metals, paper bills, and coins, to facilitate trade.

The first standardized currency was created in Lydia, a kingdom in Asia Minor, around 600 BCE. The Lydians used coins made of electrum, a natural alloy of gold and silver, to facilitate trade. Coins were easier to carry and more convenient to use than bartering with goods, and they quickly spread throughout the ancient world.

The Functions of Money

Money serves three primary functions in modern society: a medium of exchange, a unit of account, and a store of value. As a medium of exchange, money allows individuals to trade goods and services with one another. Rather than bartering, individuals can use money to purchase what they need or want, and sellers can receive payment in a form that is widely accepted.

As a unit of account, money provides a standardized measure of value that allows individuals to compare the prices of different goods and services. For example, if a shirt costs $20 and a pair of shoes costs $50, we can use money as a common denominator to compare the prices of these two items.

As a store of value, money allows individuals to accumulate wealth over time. By saving money or investing it in various assets, individuals can build financial security and achieve their long-term goals.

The Role of Money in Society

Money plays a critical role in modern society, facilitating economic activity and promoting social mobility. Without money, it would be challenging to engage in complex economic transactions or accumulate wealth over time. Money provides individuals with the means to improve their lives, pursue their dreams, and support their families.

However, money can also be a source of inequality and social conflict. Those who have more money often have more power and influence in society, while those who have less may struggle to access basic necessities or achieve their goals. Moreover, the pursuit of money can sometimes lead individuals to engage in unethical or harmful behaviors, such as fraud, corruption, or exploitation.

Conclusion

Money is a fundamental aspect of modern society, serving as a medium of exchange, unit of account, and store of value. It has a long and fascinating history, evolving over time to meet the changing needs of society. While money provides individuals with the means to improve their lives and achieve their goals, it can also be a source of inequality, conflict, and harm. As we navigate the complex and often challenging world of money, it is essential to remember its role in our lives and society and use it responsibly and ethically.

02/04/2023

Nifty FMCG Stocks with Weightage

Here is the list of top Constituents with Company Weightage

ITC Ltd. 32.32 % Stock Weightage

Hindustan Unilever Ltd. 23.24 % Stock Weightage

Nestle India Ltd. 7.97 % Stock Weightage

Britannia Industries Ltd. 6.61 % Stock Weightage

Godrej Consumer Products Ltd. 4.81 % Stock Weightage

Dabur India Ltd. 4.49 % Stock Weightage

Colgate Palmolive (India) Ltd. 3.55 % Stock Weightage

Marico Ltd. 3.24 % Stock Weightage

United Spirits Ltd. 3.20 % Stock Weightage

United Breweries Ltd. 2.43 % Stock Weightage

02/04/2023

FMCG में 10 सर्वश्रेष्ठ डिस्ट्रीब्यूटरशिप के अवसर आपको पता होने चाहिए

फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स , या FMCG , कम कीमत वाली वस्तुएं हैं लेकिन उच्च खपत हैं। बेहतरीन उदाहरण घरेलू सामान, कपड़े और भोजन हैं, और आइटम एक ग्राहक द्वारा खुदरा आउटलेट से खरीदे जाते हैं। FMCG ब्रांडों में लोकप्रिय और लाभदायक सुपरमार्केट जैसे बिग बाजार, डी-मार्ट, रिलायंस फ्रेश और छोटे किराना स्टोर और किराना दुकानें भी शामिल हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में कई उद्योग शामिल हैं, सभी धन सृजन में योगदान करते हैं । FMCG डिस्ट्रीब्यूटर वह व्यक्ति होता है जो प्रोड्यूसर और रिटेलर के बीच एक कड़ी का काम करता है। एक व्यक्ति का काम एक निश्चित FMCG फर्म के उत्पादों को बढ़ावा देना है जिसने अपने उत्पादों को विशिष्ट क्षेत्रों में वितरित करने के लिए चुना है। FMCG में डिस्ट्रीब्यूटरशिप की संभावना कंपनी द्वारा चुने गए रिटेलर के प्रकार के आधार पर भिन्न होती है । आइए अब भारत में FMCG और कुछ अन्य FMCG कंपनियों की परिभाषा देखें।

क्या आपको पता था? फॉरेस्टर रिसर्च के अनुसार, अगले दस वर्षों में FMCG में डिस्ट्रीब्यूटरशिप की संभावनाएं प्रति वर्ष 10-12% की दर से बढ़ने का अनुमान है।

FMCG और भारत का FMCG सेक्टर क्या है?
सीधे शब्दों में कहें, एक उपभोक्ता वस्तु या FMCG एक तैयार उत्पाद है जिसे ग्राहक खरीदता है।
दुनिया भर में 94% लोग कोका-विशिष्ट कोला के रेड कैन को पहचानते हैं । यह हमें ब्रांड की महत्वपूर्ण लोकप्रियता और उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव के बारे में बताता है।
कैन के साथ-साथ कोका कोला का सफेद लोगो भी ब्रांड का ट्रेडमार्क सिग्नेचर है।
इस पर विचार करें - पूरे भारत में डीमार्ट हाइपरमार्केट ने 2019 में ₹19,916 करोड़ की कुल बिक्री की , जिसका बाजार मूल्य ₹39,988 करोड़ था ।
फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स, या FMCG, का दैनिक उपयोग किया जाता है और इसकी आपूर्ति और मांग श्रृंखला व्यापक होती है।
यह क्षेत्र बाजार में बेची जाने वाली वस्तुओं के निर्माण, वितरण और विपणन का प्रभारी है।
पिछले दस वर्षों में 21.4% की आश्चर्यजनक गति से बढ़ा है ।
में , भारत का FMCG बाजार 14.8% की दर से बढ़ा , जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेज है।
एशिया-प्रशांत FMCG बाजार औसत विकास चार्ट में भारत पहले स्थान पर था, इसके बाद:
वियतनाम
मलेशिया
चीन
न्यूजीलैंड
थाईलैंड
जापान
फिलीपींस, आदि।

विभिन्न प्रकार के एफसीएमजी
FMCG आइटम औद्योगिक या गैर-औद्योगिक सामान हैं जिनका व्यापक रूप से उपभोग किया जाता है और अक्सर कम खुदरा मूल्य पर पेश किया जाता है। इन्हें आमतौर पर टिकाऊ उत्पादों, गैर-टिकाऊ वस्तुओं और सेवाओं में विभाजित किया जाता है ।

जैसा कि नाम का तात्पर्य है, टिकाऊ उत्पाद वे हैं जिनकी शेल्फ लाइफ तीन साल से अधिक है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, मनोरंजक उपकरण, और इसी तरह।

गैर-टिकाऊ वस्तुओं , जैसे कि खाद्य और पेय, ओवर-द-काउंटर फार्मास्यूटिकल्स, और इसी तरह, निर्माण की तारीख से एक वर्ष से कम का शेल्फ जीवन है।

डिटर्जेंट, प्रसाधन सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, व्यक्तिगत और समग्र स्वच्छता के सामान कुछ ही FMCG हैं जो भारतीय उपभोक्ता बाजारों पर हावी हैं।

शीर्ष FMCG वितरक कंपनियां
कंपनी के नाम

राजस्व

Hindustan Unilever Limited

₹40,511 करोड़

Nestle

₹12,117 करोड़

Marico Limited

₹7465 करोड़

Dabur

₹8813 करोड़

Britannia Industry

₹11, 211 करोड़

Procter & Gamble (P&G)

₹6,313.71 करोड़

Godrej Consumer Products Limited

₹10,156 करोड़

Pepsico

₹70,000 करोड़

ITC Limited

₹51, 321 करोड़

Coca-Cola

₹2,297.51 करोड़

02/04/2023


FMCG क्या है? FMCG से जुड़ी सभी जानकारी जो आप जानना चाहते हैं

BY RANBIR SINGH

FMCG क्या है? FMCG से जुड़ी सभी जानकारी जो आप जानना चाहते हैं
एफएमसीजी (FMCG) यानि फ़ास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स।
कंज़्यूमर गुड्स वह प्रोडक्ट होते हैं जो एक सामान्य कंज़्यूमर द्वारा इस्तेमाल के लिए खरीदे जाते हैं।

इनको तीन केटेगरी में बांटा गया है –

ड्यूरेबल, नॉन ड्यूरेबल और सेवाएं।

टिकाऊ उत्पादों यानि ड्यूरेबल गुड्स की शेल्फ लाइफ तीन साल या इससे अधिक हो सकती है, वहीं नॉन ड्यूरेबल गुड्स की शेल्फ लाइफ एक साल से कम होती है। एफएमसीजी यानि फ़ास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स, कंज़्यूमर गुड्स का सबसे बड़ा सेगमेंट है। ये नॉन ड्यूरेबल केटेगरी में आता है क्योंकि इसकी शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है।

इन प्रोडक्ट्स की शेल्फ लाइफ कम होती है क्योंकि यह प्रोडक्ट्स ज़्यादा लम्बे समय तक स्टोर करके नहीं रखे जा सकते हैं। साथ ही उपभोक्ताओं के बीच इनकी मांग अधिक रहती है। जैसे- मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स, बेक किए गए उत्पाद आदि। यह प्रोडक्ट्स ज़्यादातर खरीदे जाते हैं और तेज़ी से इस्तेमाल भी किए जाते हैं। इनके दाम कम होते हैं पर ये बिकते बड़ी मात्रा में हैं।

इनके विपरीत स्लो मूविंग कंज़्यूमर गुड्स वे होते हैं जिनकी शेल्फ लाइफ लम्बी होती हैं यानि जो ज़्यादा समय तक चलते हैं और काफी समय बाद भी खरीदे जा सकते हैं। जैसे - फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंसेज आदि।

दुनिया में लगभग हर कोई अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में फ़ास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा है। यह किराना, सुपरमार्केट आदि में छोटे स्केल पर ग्राहकों द्वारा खरीदे जाने वाले प्रोडक्ट्स हैं। जैसे - दूध, फल, सब्जियाँ, दवाएं जैसे एस्पिरिन आदि। ग्राहकों द्वारा किया जाने वाला आधे से भी ज़्यादा खर्च इन एफएमसीजी उत्पादों पर होता है। भारतीय अर्थव्यवस्था का चौथा सबसे बड़ा सेक्टर है एफएमसीजी सेक्टर। घरेलु और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद इस इंडस्ट्री की सेल का 50 प्रतिशत बनाते हैं, स्वास्थ्य उत्पादों का योगदान 31-32 प्रतिशत है वहीं बाकी का बचा हुआ 18-19 प्रतिशत खान-पान के उत्पादों से आता है।

भारत में एफएमसीजी का इतिहास :
सं 1950 और 1980 के बीच एफएमसीजी सेक्टर में काफी सीमित निवेश किया गया था। स्थानीय लोगों की खरीदने की क्षमता कम थी, जिसके कारण वे प्रीमियम प्रोडक्ट्स न लेकर सिर्फ ज़रूरत का ही कुछ सामान खरीदते थे। भारतीय सरकार लोकल दुकानदारों को सपोर्ट करना चाहती थी। हालाँकि 1980 और 1990 के बीच, लोगों के बीच वैरायटी की मांग होने लगी जिसने एफएमसीजी कंपनियों को अपने उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

एफएमसीजी कंपनियों को बढ़ावा मिलने लगा और कई नयी कंपनियों ने भी इंडस्ट्री में कदम रखा। मीडिया इंडस्ट्री भी उसी समय उभर रही थी, जिसकी वजह से कंपनियों को अपने बिज़नेस को और लाभकारी बनाने के बेहतर मौके मिले। 1991 में भारत में वैश्वीकरण और उदारीकरण होने से पहले स्थानीय ग्राहकों के लिए विदेशी कपड़ा और विदेशी खानपान उपलब्ध नहीं था। आम आदमी को ब्रांड की पहचान तक नहीं थी। 1991 के बाद, एफएमसीजी इंडस्ट्री अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से प्रभावित हुई और धीरे-धीरे विदेशी एफएमसीजी कंपनियों को भी भारत में एंट्री मिली।

एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के प्रकार :
प्रोसेस्ड फ़ूड - दूध, दही, मक्खन, अनाज आदि के प्रोडक्ट्स, पका हुआ पास्ता आदि।

प्रिपेयर्ड फ़ूड - 'रेडी टू ईट' खाद्य पदार्थ आदि।

पेय-पदार्थ - बोतलबंद पानी, एनर्जी ड्रिंक ,जूस आदि।

बेक किए हुए प्रोडक्ट्स - कूकीज , ब्रेड ,बिस्कुट आदि।

फ्रेश, फ्रोज़ेन और शुष्क पदार्थ - फ्रूट्स, सब्जी ,ड्राई फ्रूट आदि।

दवाएं - बिना पर्चे के ली जाने वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन,पेनकिलर आदि ।

साफ़ सफाई के आइटम - दरवाज़े, खिड़की, फर्श आदि साफ़ करने वाले उत्पाद।

सौंदर्य प्रसाधन - हेयर केयर, कंसीलर, टूथपेस्ट, साबुन आदि।

ऑफिस सप्लाई - पेन, पेंसिल मार्कर आदि।

एफएमसीजी इंडस्ट्री और निवेश :
एफएमसीजी उत्पादों की कम समय में अधिक बिक्री होने के कारण यह मार्किट न सिर्फ बड़ा है, बल्कि काफी प्रतियोगी भी है। विश्व की बड़ी कंपनियां जैसे टाइसन फूड्स, कोका कोला, यूनीलेवर, प्रॉक्टर एंड गैंबल आदि के बीच इस इंडस्ट्री में मार्किट शेयर के लिए प्रतिस्पर्धा रहती है। यह कंपनियां ग्राहकों को अपनी और खींचने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए प्रोडक्ट पैकेजिंग उत्पादन प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। एफएमसीजी को कंज़्यूमर पैकेज्ड गुड्स भी कहा जाता है। कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अमूमन रसद और वितरण प्रणाली में कई स्तरों पर पैकेजिंग की आवश्यकता पड़ती है। यूनिट पैक, यानी उत्पाद की वो पैकेजिंग जिसमें वह ग्राहक को बेचा जाता है ,उत्पाद सुरक्षा और शेल्फ लाइफ के लिए काफी ज़रूरी है। साथ ही यूनिट पैक पर दी गयी जानकारी ग्राहकों को सही प्रोडक्ट चुनने में मदद भी करती है ।एफएमसीजी बड़ी मात्रा में बेचे जाते हैं इसलिए ये राजस्व के एक विश्वसनीय स्रोत हैं। अधिक बिक्री से होने वाला मुनाफा इसके हर एक सेल पर कम प्रॉफिट मार्जिन के नुकसान को भी छिपा लेता है। अगर इन्हें इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखा जाए तो कम ग्रोथ के साथ भी यह एक सुरक्षित सौदा है जिसमें उम्मीद के मुताबिक़ फायदे ,स्थिर रिटर्न और नियमित लाभांश हैं।

फायदे और नुकसान :
भारतीय एफएमसीजी इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर लोगों को रोज़गार के मौके देती है। वर्तमान में 3 मिलियन से भी अधिक लोगों इस सेक्टर में काम कर रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं। डिपार्टमेंटल स्टोर, किराना स्टोर और सुपरमार्केट ऐसी जगहें हैं जहाँ से उपभोक्ता अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के ज़रूरी सामान खरीदते हैं। इक्कीसवीं सदी में लोग घरेलु सामानों में भी विविधता चाहते हैं परन्तु उन्हें खरीदने के लिए ज़्यादा ट्रेवल नहीं करना चाहते, इसलिए सुपरमार्केट् ग्राहकों को उन्हीं के आसपास में कई प्रकार के सामान उपलब्ध कराते हैं। यह उन ग्राहकों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो रहा है। रिलायंस रिटेल, बिग बाज़ार, इजी डे, स्पेंसर, स्टार बाजार, हाइपर सिटी आदि कुछ ऐसे ही सुपरमार्केट हैं। सुपरमार्केट्स काफी प्रॉफिट देते हैं हालाँकि, इन सब के बीच, लोकल किराना स्टोर्स अधिक वैरायटी न दे पाने के कारण नुकसान उठा रहे हैं।

एफएमसीजी और ई-कॉमर्स :
वहीं एक कदम आगे बढ़ते हुए आज दुनियाभर के ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन स्टोर्स के प्रति देखने को मिला है। इसकी वजह हैं घर पर डिलीवरी, ज़्यादा विकल्प, कम दाम जैसी सुविधाएं जो ऑफलाइन दुकानें उन्हें नहीं दे पा रही हैं।

ई-कॉमर्स केटेगरी में फिलहाल सबसे पॉपुलर हैं गैर-उपभोज्य टिकाऊ (नॉन कंज़्यूमेबल ड्यूरेबल) वस्तुएं। हालाँकि जैसे-जैसे कंपनियां अपने डिलीवरी सिस्टम में सुधार कर उसे पहले से बेहतर और तेज़ बना रही हैं ,किराना और अन्य उपभोज्य (कंज़्यूमेबल) प्रोडक्ट्स का ऑनलाइन मार्केट भी अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है और लोग एफएमसीजी खरीदने के लिए भी अब ई-कॉमर्स चैनल का इस्तेमाल करने लगे हैं।

एफएमसीजी इंडस्ट्री से क्या हैं उम्मीदें?
दुनिया भर के एफएमसीजी बाज़ारों की अपेक्षा भारतीय एफएमसीजी सेक्टर अभी भी सही तरह से उभर नहीं पाया है और काफी परम्परागत है। हालाँकि बढ़ते शहरीकरण और ग्राहकों की बढ़ती इनकम के साथ इस सेक्टर में अभी बढ़त के काफी स्कोप हैं। देश के नयी सदी के उपभोक्ताओं के सेवन स्वभाव के कारण मार्केट में एक व्यावहारिक बदलाव आया है। आसार हैं कि साल 2030 तक भारतीय ग्राहकों में सामान खरीदने को लेकर प्राथमिकताएं बदल चुकी होंगी। नए ज़माने के ग्राहक आज अधिक जागरूक हैं ,उन्हें अपने स्वास्थ्य और पोषण की अधिक चिंता है और साथ ही उनके पास खर्च करने की क्षमता भी अधिक है। इन्हीं बदलावों के कारण मौजूदा समय में एफएमसीजी सेक्टर के अंतर्गत ही एक नए सेक्टर ने जन्म लिया है जो लोगों को केमिकल और प्रदूषण रहित जीवन देने का दावा कर रहा है जैसे एयर और वाटर प्यूरीफायर, आर्गेनिक फ़ूड आदि। इस तरह के ट्रेंड एफएमसीजी सेक्टर को और अधिक विस्तार देंगे।

परम्परागत एफएमसीजी सेक्टर में बढ़त और आज से पहले नदारद इन नए सब-सेक्टर्स के उत्थान के साथ भविष्य में इस इंडस्ट्री का फ्यूचर ब्राइट दिखता है इसलिए निवेशकों के लिए एएफएमसीजी इंडस्ट्री एक अच्छी चॉइस हो सकती है

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